BIOS क्या है? - BIOS in Hindi & its Functions, Types
Hello दोस्तों! आज हम इस post में BIOS के बारें में पढेंगे. यह computer science का एक important टॉपिक है तो चलिए शुरू करते है.
BIOS क्या है? - BIOS in Hindi
BIOS का पूरा नाम Basic Input/Output System होता है. जब भी हम अपना कंप्यूटर start करते है तो सबसे पहले जो स्क्रीन दिखती है, वही BIOS होता है. यह मदरबोर्ड के साथ जुड़ा हुआ एक सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर चालू होते ही अपने आप run होने लगता है.
सरल शब्दों में कहें तो BIOS एक ऐसा प्रोग्राम है जो कंप्यूटर को boot करने के लिए जिम्मेदार होता है. यह hardware के सभी connections का पता लगाता है और check करता है कि सब कुछ सही से काम कर रहा है या नहीं. इसके बाद ही operating system load होता है.
BIOS कंप्यूटर की ROM मेमोरी में store रहता है. CPU, operating system load होने से पहले ही BIOS को access कर लेता है, इसीलिए यह कंप्यूटर start होते ही activate हो जाता है. इसका मुख्य काम hardware को set करना और operating system को शुरू करना होता है. साथ ही यह input और output devices को भी control करता है.
BIOS सॉफ्टवेयर का प्रयोग पहली बार IBM ने वर्ष 1981 में किया था, अपने personal computer में. कुछ ही समय में यह इतना popular हो गया कि सभी प्रकार के कंप्यूटरों में इसका इस्तेमाल होने लगा. इसे "BYE-oss" भी कहते है और इसके अन्य नाम है ROM BIOS, PC BIOS और System BIOS.

BIOS के फंक्शन्स - Functions of BIOS in Hindi
BIOS के कार्य - Working of BIOS in Hindi: -
BIOS बहुत सारे काम करता है. एक-एक करके समझते है.
सबसे पहला काम है Power on Self-Test (POST) करना. जैसे ही कंप्यूटर start होता है, BIOS यह check करता है कि सभी hardware devices जैसे keyboard, mouse, RAM आदि सही से काम कर रहे है या नहीं. इस पूरी प्रक्रिया को POST कहते है.
POST पूरा होने के बाद BIOS booting का काम करता है. Booting में operating system का पता लगाया जाता है और उसे start किया जाता है. यह BIOS का सबसे important काम है.
इसके बाद BIOS उन सभी software और drivers को कंप्यूटर में load करता है जो operating system के साथ run होते है. ये drivers, operating system और connected devices के बीच एक interface की तरह काम करते है.
फिर BIOS कंप्यूटर में मौजूद सभी registers को initialize करता है ताकि कंप्यूटर सही ढंग से काम कर सके. इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि CPU के सभी registered files ठीक से काम करने योग्य है या नहीं.
सबसे आखिर में BIOS, CMOS में store की गयी settings को read करता है. इसी को BIOS Setup या CMOS Setup भी कहते है. इन settings के आधार पर ही कंप्यूटर तय करता है कि किस device से boot करना है.
BIOS के प्रकार क्या है? - Types of BIOS in Hindi
BIOS मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है.
पहला है Legacy BIOS. यह पुराने motherboards में देखने को मिलता है. इस type का BIOS 2.1 TB से ज्यादा की hard drive को support नहीं करता. इसका interface text-based होता है यानी इसमें केवल keyboard से navigation करनी पड़ती है. क्षमता के मामले में यह UEFI से कम है.
दूसरा है UEFI (Unified Extensible Firmware Interface). यह modern type का BIOS है. UEFI 2.2 TB या उससे भी बड़ी hard drives को आसानी से handle कर सकता है. यह पुराने MBR (Master Boot Record) की जगह GPT का इस्तेमाल करता है. UEFI का interface graphical होता है जिसमें mouse से भी काम किया जा सकता है और booting भी Legacy BIOS से काफी तेज होती है.
BIOS कहा स्टोर रहता है? - BIOS memory in Hindi
BIOS मदरबोर्ड में लगी एक electronic chip में store रहता है. इस chip का नाम CMOS (Complementary Metal Oxide Semiconductor) है. इसी chip में BIOS की सारी settings store रहती है.
CMOS एक battery से power लेती है जिसे CMOS battery कहते है. यही वजह है कि कंप्यूटर बंद होने के बाद भी उसका date और time reset नहीं होता. अगर यह battery खत्म हो जाये या निकाल दी जाये तो BIOS की settings reset हो जाती है.
BIOS एक EEPROM (Electronically Erasable Programmable Read Only Memory) type की मेमोरी में store होता है. इसे हम आसानी से delete नहीं कर सकते, लेकिन electronically erase करके reprogram किया जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर BIOS को upgrade किया जा सके.
BIOS और CMOS मैं अंतर - Difference between BIOS and CMOS in Hindi
| क्र. | BIOS | CMOS |
|---|---|---|
| 1:- | BIOS का full form Basic Input Output System होता है. | CMOS का full form Complementary Metal Oxide Semiconductor होता है. |
| 2:- | BIOS एक सॉफ्टवेयर है जो ROM में store रहता है. | CMOS एक hardware chip है जो मदरबोर्ड में लगी होती है. |
| 3:- | BIOS का काम POST करना, boot करना और drivers load करना होता है. | CMOS का काम BIOS की settings को सुरक्षित रखना होता है. |
| 4:- | BIOS को CMOS से power मिलती है. | CMOS को एक अलग battery से power मिलती है जिसे CMOS battery कहते है. |
BIOS सेटिंग ओपन और रिसेट कैसे करें
BIOS सेटिंग ओपन करने का तरीका
BIOS setting open करना बहुत आसान है. सबसे पहले अपना कंप्यूटर restart करें. जैसे ही कंप्यूटर चालू हो, उसी moment में keyboard की shortcut keys में से कोई एक, जैसे F2, F12, Delete या Esc, बिना देर किये दबा दें. बस इतना करते ही आपके कंप्यूटर की BIOS setting खुल जाएगी.
BIOS रिसेट कैसे करें?
कभी-कभी BIOS को reset करने की जरूरत पड़ती है, जैसे कि पुराना कंप्यूटर खरीदने पर, password की वजह से system lock हो जाने पर, या hardware में कोई बदलाव करने के बाद. इसके लिए नीचे दिए steps follow करें.
- सबसे पहले कंप्यूटर की power button को 10 seconds तक दबाकर रखें जब तक वह बंद न हो जाये.
- कंप्यूटर off होने के बाद उसे फिर से on करें और स्क्रीन आते ही ESC या Delete key दबाकर BIOS setting open करें.
- BIOS setting में जाकर "Restore Defaults" option पर click करें.
- इसके बाद F10 key press करके settings save करें और Enter दबाकर बाहर निकलें.
BIOS का इतिहास - History of BIOS
BIOS का आविष्कार वर्ष 1975 में Gary Kildall के द्वारा किया गया था. Gary Kildall एक अमेरिकी computer scientist थे. पहली बार इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल CP/M operating system में किया गया था.
उस समय बायोस का उपयोग booting के दौरान load होने वाले CP/M machine के विशेष भाग का वर्णन करने के लिए होता था. 1990 के दशक में personal computers में इसका इस्तेमाल होने लगा और Microsoft के DOS के आगमन के साथ यह काफी popular हो गया.
शुरुआत में BIOS को ROM chips पर रखा जाता था. बाद में इसे ROM से हटाकर EEPROM या flash drive में store किया जाने लगा. वर्ष 1981 में IBM ने पहली बार अपने personal computer में BIOS का इस्तेमाल किया और बहुत जल्द यह हर कंप्यूटर का एक जरूरी हिस्सा बन गया. आज के समय में कुछ computers में BIOS सॉफ्टवेयर का size 16-megabyte या उससे भी अधिक हो सकता है.
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