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Computer Network में Frame Relay क्या है?
आज की इस पोस्ट मैं हम कंप्यूटर नेटवर्क के एक टॉपिक Frame Relay in Hindi के बारे मैं जानेंगे और इसमें हम Frame Relay के Advantages, Disadvantages और layers को भी पढ़ेंगे। इसमें हमने Frame Relay in Hindi को सरल भाषा मैं समझाया है जिससे की आपको इसे पढ़ने और समझने मैं आसानी होगी। इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े।
Layers of Frame Relay[/caption]
Introduction
Data का communication कंप्यूटर नेटवर्क में बहुत जरूरी होता है जो की कई सारे applications और services को सहायता करती है। यहाँ पर डाटा कम्युनिकेशन का मतलब कई सारी अलग - अलग devices के बीच नेटवर्क के जरिए डाटा का transmit करना होता है। लेकिन इसमें जितनी भी अलग - अलग devices है उन सभी का transmission speeds, data formats, और protocols अलग - अलग हो सकते है। इस लिए इनको एक common नेटवर्क टेक्नोलॉजी की जरूरत होती है जो हर एक device के साथ compatible हो और डाटा communication को possible बनाए। Frame Relay भी एक ऐसी ही तकनीक है जो नेटवर्क में efficient और standardized data transfer को enable करता है।What is Frame Relay in Computer Network in Hindi? - Frame Relay क्या है?
ये जो Frame Relay होती है वह एक प्रकार की packet-switching टेलीकम्यूनिकेशन service है जो cost-effective डाटा ट्रांसमिशन प्रदान करता है खाश तौर पर उस वक्त जब data traffic कभी - कभी और अनियमित होता है। इसका उपयोग LANs यानि local area networks और WANs यानि wide area networks दोनों endpoints के बीच data का transmit करने के लिए होता है। कुछ समय पहले तक Frame relay काफी ज्यादा popular service हुआ करती थी लेकिन आज के समय में ISPs ज्यादा तर इस का उपयोग नहीं करते है। Sprint जो अब T-Mobile का एक पार्ट है उसने Frame relay सर्विस को आज से कुछ साल पहले यानि 2007 में बंद कर दिया था। Verizon ने भी नए customers के लिए 2009 में इस service को बंद दिया और इसे पूरी तरह से साल 2013 में phase out कर दिया। AT&T ने भी इस Frame relay सर्विस को offer करना बंद कर दिया लेकिन कुछ existing customers है जिन को इस सर्विस का 2016 तक support दिया। Frame Relay ज़्यादातर services के लिए नेटवर्क एक PVC यानि permanent virtual circuit प्रदान करता है। इसका मतलब यह है की customer को बिना full-time leased line के लिए pay किए बिना एक निरंतर और dedicated connection मिलता है। इसमें Service provider ही यह तय करते है की इसके हर एक फ्रेम को कैसे route करना है और इनके जो charges होते है वह इनके उपयोग के हिसाब से लगते है। SVC (switched virtual circuits) इसकी तुलना में अस्थाई कनेक्शन होते है जो एक specific data transfer को पूरा होने के बाद नष्ट हो जाते है।Layers of Frame Relay in Hindi
Frame Relay में दो तरह की layers होती है जिनको हमने नीचे define किया है -- Data Link Layer
- Physical Layer
Layers of Frame Relay[/caption]
Data Link Layer
डाटा पैकेट्स को फ्रेम करना, addressing, error detection, congestion management, और multiplexing जैसे आदि काम करना Data link layer का होता है। साथ यह layer logical connections भी specify करता है जिसे हम virtual circuits के नाम से जानते है और यह कई अलग - अलग devices को एक common media पर communicate करने में सहायता करता है। virtual circuits को पहचानने के लिए डाटा पैकेट्स को फ्रेम्स में encapsulate किया जाता है जिसमे DLCIs का उपयोग किया जाता है।Physical Layer
Frame Relay में Physical layer का काम है कई अलग - अलग devices के बीच में physical connections को स्थापित करना, maintain, और disconnect करना आदि। इसके अलाबा ये ट्रांसमिशन मेडियम के mechanical और electrical properties को cover करना होता है जैसे cables, connections, और voltage levels आदि। यह कई physical layer protocols को support करता है जैसे T1, T3, ISDN, और fiber optics आदि। ये ANSI standards को भी follow करता है।Advantages of Frame Relay in Hindi - Frame Relay के फायदे
- Efficiency: यह X.25 से बहुत ज्यादा efficient है क्योकि यह data connection layer पर एरर करेक्शन और फ्लो कंट्रोल को skip करता है। यह काम higher लेयर्स या end devices के जरिए होता है जो network latency और overhead को कम करने में सहायता करता है।
- Variable-Length Packets: यह सिस्टम variable-length पैकेट्स को support करता है जो अलग - अलग डाटा और applications के लिए उपयुक्त है।
- Dynamic Bandwidth Allocation: इस सर्विस में dynamic bandwidth भी allocation होते है जो traffic patterns और changing network conditions के हिसाब से adjust होता है।
- Overload Control Techniques: यह source और destination devices को नेटवर्क overload के बारे में Alert करती है जिससे वह अपने transmission rates को उसके हिसाब से adjust कर सकते है।
- Cost-Effectiveness: यह cost-effective भी है क्योकि यह multiple nodes यानि कई सारे नोड्स को एक साथ connect करने के लिए कई physical cables और devices की ज़रुरत को minimize करता है।